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Monday, June 20, 2016

दिल में है दर्द, तो ग़ज़ल करना पडेगा...



अपने शब्दों को थोडा सरल करना पडेगा.
दिल में है दर्द, तो ग़ज़ल करना पडेगा..
गर बनना है सूरज, चमकने के लिये तो.
दोस्तों अन्दर ही अन्दर, जलना पडेगा..
मन्जिलों तक पहुँचना है तो रस्तों पर.
तन्हा बहोत दूर तक, चलना पडेगा..
बदलाव कोई बडा, लाना है तो 'श्वेत'.
पहले खुद अपने आप को बदलना पडेगा..
वरिष्ठ जनों का हार, बनाने के लिये माली को.
कुछ मासूम फूलों को, मसलना पडेगा...
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Saturday, June 18, 2016

एक गीत



ओ छोहरियों
छछिया भर छाछ पे
प्रभु का मन हर लो
ओ छोहरियों
छछिया भर छाछ पे 
प्रभु के संग हो लो ...
सेस गनेस महेस दिनेस
पूछे ऊधो से हरि का पता
माँ का पता दूँ या राधा कहूँ
या दूँ किसी ग्वालन का ठिकाना
ऊधो ना समझे कहाँ कहाँ जाए
हार के अपने मन में ही गाए ...
ओ छोहरियों
छछिया भर छाछ पे
प्रभु का मन हर लो
ओ छोहरियों
छछिया भर छाछ पे
प्रभु के संग हो लो ...
काग के भाग देख सब जरी जरी जाए
हरि हाथ से वो तो माखन रोटी खाए
धूरि से लिपटी हरि की काया
गोकुळ के आँगन पैंजनिया बजाये
हरि को पाने को सब हैं बेचैन
हर्षित मन हुलस हुलस गाए
ओ छोहरियों
छछिया भर छाछ पे
प्रभु का मन हर लो
ओ छोहरियों
छछिया भर छाछ पे
प्रभु के संग हो लो ...
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