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Tuesday, February 23, 2016

सारी बातें सुनी-सुनायीं !!

सारी बातें सुनी-सुनायीं,
किन बातों पर यकीं करें, और
कौन सी बातें, बात बनायीं !
सारी बातें सुनी-सुनायीं !!

इसने कहा कुछ, उसने सुना कुछ,
इसने किया कुछ, उसको लगा कुछ। 
जिसको जैसा लगा घुमाया,
अपनी रोटी खूब पकायी !
सारी बातें सुनी-सुनायीं !!

ऐसी बातें सुनकर हमने,
उसको ही सच मान लिया। 
औरों ने उकसाया हमको,
और हमने बस ठान लिया। 
इसको मारा, उसको काटा,
घर-घर हमने आग लगायी !
सारी बातें सुनी-सुनायीं !!

क्या हम में अब समझ नहीं है,
क्या ख़ुद की कोई सोच नहीं। 
या फिर इन्सां होने का,
अब हमको कोई गर्व नहीं। 
किसी को बेवा, कोई यतीम,
हर इक आँखें खून रूलायीं !
सारी बातें सुनी-सुनायीं !!














किन बातों पर यकीं करें, और
कौन सी बातें, बात बनायीं !
सारी बातें सुनी-सुनायीं !!

7 comments:

  1. Thanx a lot Anand for your appreciation...

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  2. Very nice poem.
    Living in a conscious manner and also helping others to live in similar way is definitely your hallmark.
    R K Verma

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanks a lot Sir.
      It's privilege to hear these words from you. It's just because of your guidance and blessings.

      Delete

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