Play a Game

Saturday, January 30, 2016

Clock Anti-Clock... A Science Fiction Film...

Clock Anti-Clock... A Science Fiction Film...

This 6.5 minutes of film will change your perception about time...If you did not watch this then you missed reversing time of your life... 



About the film - 
Our lives, knowingly or unknowingly, sometimes get stuck in some time-frame because of some object, incident or desire. We cannot come out from that loop without identifying the reason. So happened with protagonist. 
A 6 minute short science fiction on time travel.

Awards: 
'Best Spot film' and 'Best Direction Award' at "Chaya-13".

About the Actor :
'Rohit Kapoor'  as an actor, he has worked on many theatre plays including Mahesh Bhatt's 'Trail of Errors'.

About the Director :
'Deepak Sharma' is a theatre artist, film-maker who started his artistic journey in 2009 in Bangalore after completing Engineering from NIT Calicut. He has since then extensively worked on 'improvisational theatre' and taking theatre to underprivileged and differently baled people with developing new and new styles of theatre. He has also constantly working on documentaries and films; some of his projects like 'Clock Anti-clock', experiments with time with making time another dimension,has won Best spot film and Best Direction award and were part of prestigious film festivals like 'National Science film festival' and 'IDSFK' in 2013. His upcoming projects like 'Sileneced' highlights issue of Jammu-Kashmir’s conflict with a silent documentation of an artist and also crafts a unique story-telling in documentary. Another untitled science fiction project roams around current relationship complications of India, technology and lives. To keep his passion alive, Deepak is working in corporate world and his rich experience of business management, people skills adds-on to the film-making business.
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Tuesday, January 26, 2016

Vande Matram - IMA Indian Music Authority




IMA, Indian music authority is a boy band from new delhi.

IMA is established in 2016 is an Indian pop based band.

IMA have it's own production both music and video.

VANDE MATARAM, this single track dedicated to all those people who gave there lives for our country INDIA...

Respect..To all well known legends of our country.

Respect..#IMA

DOWNLOAD mp3- http://picosong.com/8y2A/


https://www.youtube.com/watch?v=4M05bphnXaE

must watch..like...support..

IMA, Indian music authority is a boy band from new delhi.

IMA is established in 2016 is an Indian pop based band.

IMA have it's own production both music and video.

INDIAN MUSIC AUTHORITY CONSISTS-

aK- AKASH
-https://www.facebook.com/rapztaraK?fref=ts

official page- https://www.facebook.com/Akash-kumar-ak-742452852534904/?ref=hl
(singer, lyricist, music director,editing)

TARUN SOLANKY
https://www.facebook.com/tarun.solanki.9678?fref=ts
(singer,lyricist,music composer)

HEMANT ADWANI
https://www.facebook.com/hemant.adwani?fref=ts
(singer)

HARSHIT
https://www.facebook.com/harshit.chugh.75?fref=ts
(videography)

TARUN Kumar Sonkar
https://www.facebook.com/Tarun51614?fref=jewel
(direction and video editor)


join us on; https://www.facebook.com/IMA-Indian-music-authority-577495372401993/?pnref=lhc

contact us on; Indianmusicauthority1@gmail.com

In the Memories of the Legends of India - www.writerstorm.in


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Friday, January 22, 2016

लबों की हताशा...

Labon ki hatasha - by Shwet - www.writerstorm.in
सफ़हे में लिपटी है, लम्हों की बातें,
लम्हों की बातें, सदियों की बातें।
बातें, जो पूरी हुई ही नहीं,
बातें, जो अधूरी रह गयी।
बातें, जो कह गयी अनकही,
बातें, जुबां तक, जो रह गयी।
फिर भी हमको इसपर ना यकीं है,
कि तुमने उस बात को, समझा नहीं है।
जो समझे ना थे तो, पलकें क्यों झपी थी।
पल भर को सांसे, क्यों थम सी गयी थी।।
लबों पर तबस्सुम, ठहर क्यों गयी थी।
और चूड़ियाँ, क्यों सहम सी गयी थी।।
जब मैंने समझ ली उन आँखों की भाषा,
तो कैसे इसपर यकीं मैं करूँ,
कि तुमने ना समझी, लबों की हताशा...

कि तुमने ना समझी, लबों की हताशा... 
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Tuesday, January 19, 2016

Lyrical Dance on Kabhi-Kabhi Vs Phir Mohobbat by Tarun




Hey Guys, Watch my Another Video please, hope you will Like it...

Few Screenshots ;) ...


Lyrical Dance by Tarun Kumar
A step in Lyrical Dance by Tarun Kumar

Slow walk in Lyrical Dance by Tarun Kumar

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Monday, January 18, 2016

Urban Hip-Hip Dance Workshop - On Back to Sleep By Chris Brown



Hello Guys, I am Tarun and I am a dancer and I am sharing my video on WriterStorm.in hope you will all like it
and thnx Sunil Sir for inviting me here... 

Some Glimps-
In a Hip-Hip Dance Step - Tarun

In a Hip-Hip Dance Step - Tarun

In a Hip-Hip Dance Step - Tarun

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Sunday, January 17, 2016

ये दिल जो कहे हम करते रहें...















कुछ कह ना सकूँ, चुप रह ना सकूँ !
ना इसमे सुकूं, ना उसमे सुकूं !!
किस कफ़स ने मुझको बाँध रखा,
कि आग हूँ मैं, पर जल ना सकूँ !!

इक सोच, जो मेरी ज़हन में है !
हालत, जो मेरे सहन में है !!
एक मैं हूँ जो, मैं हूँ ही नहीं,
एक कैद, जो मेरी रहन में है !!

अभी हूँ मैं खुद से ज़ुदा-ज़ुदा !
हूँ ख़फा, मगर मैं ख़फा नहीं !!
किस रात ने मुझको घेर रखा,
है सुबह, मगर हुई सुबह नहीं !!

एक टायर फिर मैं सड़क रखूं !
ले छड़ी मैं पीछे दौड़ पडूँ !!
फिर इंटरवल की घंटी पर,
मैं बाउंड्री वॉल को फांद चलूँ!!

फिर कन्चों की एक फ़ौज़ सजे !
फिर गिल्ली डण्डा लीग बने !!
फिर दिए छुपाऊँ मिटटी में,
फिर काग़ज़ की एक नांव बने !!

ना सुबह के 6, ना रात के 10 !
कोई कहने वाला ना हो बस !!
ये दिल जो कहे हम करते रहें,
आज़ाद फिरें हम तोड़ कफ़स !!
ये दिल जो कहे हम करते रहें,
आज़ाद फिरें हम तोड़ कफ़स !!
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Friday, January 15, 2016

शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है...

God has not religion.













ईमान फिर किसी का नंगा हुआ है.
शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है..

वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.
ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है..
शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है..
फिर से गलियां देखो खूनी हुई हैं.
गोद कितने मांओं की सूनी हुई हैं..
उस इन्सान का, क्या कोई बच्चा नहीं है?
वो इन्सान क्या, किसी का बच्चा नहीं है??
हाँ, वो किसी हव्वा का ही जाया है.
वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.
ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है.. शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है...


लोथड़े मांस के लटक रहे हैं.
खून किसी खिडकी से टपक रहे हैं..
आग किसी की रोज़ी को लग गयी है.
कोई बिन माँ की रोजी सिसक रही है..
हर एक कोने आप में ठिठक गये हैं.
बच्चे भी अपनी माँओं से चिपक गये हैं..
इन्सानियत का खून देखो हो रहा है.
ऊपर बैठा वो भी कितना रो रहा है..
दूर से कोई चीखता सा आ रहा है.
खूनी है, या जान अपनी बचा रहा है..
और फिर सन्नाटा सा पसर गया है.
जो चीख रहा था, क्या वो भी मर गया है??
ये सारा आलम उस शख्स का बनाया है.
वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.
ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है.. शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है...


वक्त पर पोलीस क्यों नहीं आई?
क्योंकी, ये कोई ऑपरेशन मजनूं नहीं था..
नेताओं ने भी होंठ अपने बन्द रक्खे.
क्योंकि, खून से हाथ उनके भी थे रंगे..
सरकार भी चादर को ताने सो रही थी.
उनको क्या, ग़र कोई बेवा हो रही थी..
पंड़ित औ मौलवी भी थे चुपचाप बैठे.
आप ही आप में दोनों थे ऐंठे..
हमने भी, अपना आपा खो दिया था.
जो हो रहा था, हमने वो खुद को दिया था..
दोषी हम सभी हैं, जो दंगे हुए हैं.
ईमान हम सभी के ही, नंगे हुए हैं..
खून से हाथ हमसभी के ही, रंगे हुए हैं...
पर दंगे का वो सबसे बड़ा सरमाया है.
वो एक पत्थर, पहला जिसने चलाया है.
ईमान बस उसी का ही नंगा हुआ है.. शहर में सुना है फिर दंगा हुआ है...


चंद सिक्कों की हवस, और कुछ नहीं था.
हिन्दू ना मुसलमां, कोई कुछ नहीं था..
हिन्दू नहीं, जो इन्सान को इन्सां ना समझे.
मुसलमां नहीं, जो इन्सानियत को ईमां ना समझे..
आपस में लड़ाये धर्म है हैवानियत का.
प्यार ही इक धर्म है इन्सानियत का..
हम कब तलक ऐसे ही सोते रहेंगे?
भड़कावे में गैरों के, अपनों को खोते रहेंगे??
बेशर्मों से तब तलक हम नंगे होते रहेंगे?
बहकावे में जब तलक दंगे होते रहेंगे!!  बहकावे में जब तलक दंगे होते रहेंगे!!!


Religions, like languages, sound different even when they say the same things. - Swami Vivekanand
Indian languages

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Saturday, January 9, 2016

मुस्कुराने के वजह!!!


मुस्कुराने के वजह!!!
पहले बहोत से थे,
कभी नन्ही सी तितली को देखकर
उसके पीछे भागना,
तो कभी,
खाली माचिस की डिबिया को उछालना...
कभी सन्तरे वाली टॉफी पाकर
यूँ लगता, जैसे सबकुछ तो मिल गया है.
तो कभी
अंगूर के गुच्छे पाकर!

कभी चीनीवाली वो मिठाई,
तो कभी रामनारायन चाचा के यहाँ की जलेबी...
वो कंचे, वो गिल्ली-डंडा,
वो दिवाली के दिए,
वो पाँच छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़े,
वो कागज़ से तरह-तरह के बने खिलौने,
और ना जाने क्या-क्या!!

खुशियाँ बहोत छोटी-छोटी थीं,
पर उनसे जिस्म ही नहीं,
रूह तक मुस्कुरा उठती थी...
और यूँ लगता,
जैसे और कुछ चाहिए ही नहीं,
सब कुछ तो मिल गया है!!!

पर आज,
खुशियाँ कितनी सिमट गयी हैं,
तीन साल में मिला कोई Promotion.
दो साल में पूरा किये हुए
किसी Project के लिए Boss की बधाई.
पुरे साल भर में Achieve किया हुआ कोई Target..
और महीने की पहली तारीख को आई हुई Salary ...

और उसपर भी ये ग़म,
कि पहले सप्ताह में सब ख़तम...

शायद,
कुछ ज़्यादा पाने की ख़्वाहिश में,
जो थोड़ा पास था वो भी गंवा बैठे हैं.
आँखों में लिए फिरते हैं समन्दर,
और Plastic Smile से सब छुपा बैठे हैं..
मुस्कुराने के वजह तो कुछ भी ना थे,
बेवजह ही हम मुस्कुरा बैठे हैं...
बेवजह ही हम मुस्कुरा बैठे हैं...

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Wednesday, January 6, 2016

Gratitude - The Best Attitude...


"A moment of Gratitude makes a difference in your Attitude..." - Bruce Wilkinson.
The topic I've chosen to write today is as broad as the universe, but I'll try to write some points to let us know what gratitude is and for what we have to grateful for.
Gratitude means being thankful. Thankful for what we have, what we are, whatever we are in past and what we'll become in future. In a broad way there are three ways or we can say three forms for which we have to be grateful in each and every day :

1. Self Gratitude :

Thankfulness
The most challenging thing in our life is to accept what we are. We always believe what others says about us, and do what others told us to do. We live in the illusion of a tradition which is being followed by us since beginning. But the real thing is to believe in self, accepting what we are despite of what others says us. We are neither good nor bad, neither beautiful nor ugly, neither rich nor poor, neither brave nor coward. We are what we believe we are, and accepting this is the true gratitude to self.

2. Gratitude to Others : 


Everyday there are lots of things are getting ready by others for us, in our home, in the city, at our office, at our workplace by someone we like, someone we don't; someone we know, someone we don't; someone we see, someone we don't. We might never think about them or maybe we did, but if we start giving thanks to them will change our life, will change or Attitude towards life. So, start giving thanks to others who made our life so easy, and places to live better.


3. Gratitude to God :


'Prayer' almost everyday, each of us do. But most of the time we pray the same way, everyday; we repeat the same 'prayer' again and again. I am not telling that repeating the same thing is wrong but there are a different way we can be 'grateful to 'God'. We can write (or say) 2 to 5 things daily for which we are grateful for (i.e., 'I am grateful for' this morning, this place, the job we do, the pen we have, the food we eat, the way we live, the friends and family we have etc. etc.). By doing this we feel that we have enough to be grateful about and this will give us a lot of happiness and completeness in our life.


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Saturday, January 2, 2016

Five Simple Things to do in This New Year

Every New Year we take some resolutions; sometimes we try hard to accomplish that and sometimes we let it go. But in all this, we forget to live life fully. We are sharing here some simple things to do in this New Year and you don't have to make any difficult resolutions. Try to do these simple things and make your life beautiful.

1. Eat Healthy & Stay Fit : 
'Health is wealth' and being healthy is not a difficult task, you just need to do some simple things, like eating fresh-n-healthy vegetables and fruits, organic foods or supplements, do Yoga or exercise daily and think positive. All these simple things keeps you healthy and Fit.

2. Spend your time with Friends and Family :
We are social but 'online' :P. It's good we are social and connected worldwide as it was said in our Hindu Mythology "वसुधैव कुटुंबकम" but it doesn't mean that we forget our near and dear friends and family. Other than spending more time on Mobile/ Tab or social media we must have to meet our friends on our 'Addas' and spend more time with our family.

3. Invest in People :
Precious gift given by God is ‘Time’ and investing it wisely is our duty; and a best way of investing it to invest in People. Yes! Investing time in people is the best way to make best out of it. All the things of this world are moving because of people whether it is any business or relationship. So... Invest in People.

4. Travel New Places :



Travelling new places are always good. As we all know changes are always good, and changing our atmosphere is good for our body and soul. So make a plan and visit new places whenever you get time from your busy schedule.

5. Be Child Once again :
What we miss a lot now a days; Yes! You are absolutely right, we miss our childhood a most. So, be child once again, smile often, listen to your heart, do whatever you want to do, play with children. Make ‘Child-like’ faith but don't be ‘Childish’. (We will post soon what is the difference between ‘Child-like’ and ‘Childish’?)

All these activities will make you happy and give you a hope to live life happily. It is not sadness or clumsiness all over in life, there are lots of happiness, joy, hope and prosperity everywhere; come and join us, we all will make this world happier and healthier place to live. J

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